बाजार में तेजी और मंदी का दौर क्या होता है

"बाजार में तेजी का दौर (बुल मार्केट)" और "बाजार में मंदी का दौर (बेयर मार्केट)" शब्दों का इस्तेमाल प्रतिभूति बाजार (सिक्यूरिटीज़ मार्केट) में देखे जा रहे रुझानों के लिए किया जाता है।

बाजार में तेजी का दौर (बुल मार्केट): ऐसी स्थिति होती है जब शेयरों की कीमतें बढ़ रही होती हैं और निवेशकों को लगता है कि बाजार में पैसा लगाने से उन्हें फायदा होगा । ऐसा तब होता है जब अर्थव्यवस्था बढ़िया चल रही हो, कारोबार तेजी से बढ़ रहे हों, उनके उत्पादों और सेवाओं की अधिक मांग हो और वे अच्छा मुनाफा कमा सकते हों । इससे शेयरों की कीमत बढ़ती हैं और निवेशकों का पैसा भी बढ़ता है ।

बाजार में मंदी का दौर (बेयर मार्केट): ऐसी स्थिति होती है जब शेयरों की कीमतें गिर रही होती हैं और निवेशकों को लगता है कि बाजार में पैसा लगाने से उन्हें घाटा होगा । ऐसा तब होता है जब अर्थव्यवस्था खराब हो, देश में मंदी के हालात हों, भू-राजनीतिक हालात खराब हों, या प्राकृतिक आपदाएँ आदि आई हुई हों ।