निवेशकों को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

Caution Against Ponzi Schemes

पोंजी स्कीम एक धोखाधड़ी या कपटपूर्ण तरीके से किया गया निवेश घोटाला है जिसमें मुनाफों को लेकर निवेशकों से बढ़ाचढ़ाकर वादे किए जाते हैं । असल में इस स्कीम में वास्तविक लाभ कमाने की बजाय पुराने निवेशकों को उनके अपने पैसे या उनके बाद स्कीम में आने वाले निवेशकों द्वारा दिए गए पैसों से ही मुनाफे दिए जाते हैं । किसी पोंजी स्कीम द्वारा अपने विज्ञापनों में बताए गए मुनाफे दे पाना तभी संभव होता है जब उसके निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ती जाए ।

अक्सर पोंजी स्कीम नए निवेशकों को ऐसे मुनाफों की गारंटी देकर लुभाती है, जो दूसरे निवेश नहीं दे सकते, जो कम समय में ही मिल जाते हैं और जो आम तौर पर मिलने वाले मुनाफों से कहीं अधिक होते हैं तथा लगातार मिलते रहते हैं जो कि सामान्यत: संभव नहीं है । स्कीम में जैसे-जैसे और निवेशक जुड़ते जाते हैं, वैसे-वैसे अधिकारियों की नज़र में वह स्कीम आने की संभावना बढ़ जाती है । ऐसा देखा गया है कि उस समय बचे हुए निवेशकों का पैसा लेकर स्कीम चलाने वाला (प्रोमोटर) गायब हो जाता है । यही वजह है कि इस तरह की योजनाएँ ज्यादा टिक नहीं पातीं और बंद हो जाती हैं क्योंकि नया निवेश आना कम हो जाता है और स्कीम चलाने वाले (प्रोमोटर) को किए गए वादे के मुताबिक मुनाफे देने में दिक्कत आती है ।

इस सिस्टम का ध्वस्त होना तय है क्योंकि इसमें कमाई, यदि कोई हो, निवेशकों को अदा किए जाने वाले पैसे से कम है । कभी-कभार, अधिकारियों को किसी स्कीम के बारे में संदेह हो जाता है कि वह पोंजी स्कीम है और वे ऐसी स्कीमों के बंद होने से पहले ही उस पर अपना शिकंजा कस देते हैं ।

यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं जो पोंजी स्कीम का पता लगाने में आपकी मदद करेंगे :

बहुत कम या बिना जोखिम के अधिक मुनाफा : - हर निवेश में कुछ न कुछ जोखिम जरूर होता है । अधिक मुनाफा मिलता है तो जोखिम भी अधिक होता है । किसी भी अधिक मुनाफे वाले गारंटीशुदा निवेश का अवसर मिलने पर सर्तक हो जाएँ ।

लगातार होने वाला मुनाफा: - समय के साथ-साथ निवेशों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं । समग्र बाजार की स्थितियों से अछूता रहकर लगातार अधिक मुनाफा देने वाले निवेश पर आखँ मूंद कर भरोसा न करें ।

अरजिस्ट्रीकृत निवेश: - पोंजी स्कीमों में आम तौर पर ऐसी निवेश स्कीम शामिल होती हैं जो विनियामकों या उन गतिविधियों को देखने वाली किसी भी सरकारी एजेंसी से रजिस्ट्रीकृत नहीं होती । रजिस्ट्रीकरण जरूरी होता है क्योंकि इससे निवेशकों को कंपनी के प्रबंधन, उत्पादों, सेवाओं और वित्त के बारे में जानकारी मिलती है ।

बिना लाइसेंस वाले विक्रेता : - किसी भी निवेश स्कीम के लिए यह जरूरी है कि वह संबंधित प्राधिकरण से रजिस्ट्रीकृत हो और राज्य के प्रतिभूति संबंधी कानूनों के तहत भी यह अनिवार्य है कि निवेश संबंधी पेशेवर और फर्म लाइसेंस या रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करें । अधिकांश पोंजी स्कीम बिना लाइसेंस वाले व्यक्ति या अरजिस्ट्रीकृत फर्में चलाती हैं ।

अस्पष्ट जानकारी : - यदि आपको उनकी बातें समझ नहीं आतीं या आप उनके बारे में पूरी जानकारी हासिल नहीं कर सकते, तो आप निवेश न करें । खाता विवरण संबंधी त्रुटियाँ इस बात का संकेत हो सकती हैं कि वादे के अनुरूप पैसों का निवेश नहीं किया जा रहा है ।

भुगतान मिलने में कठिनाई : - यदि आपको भुगतान नहीं मिलता या पैसे निकालने में कठिनाई आ रही है, तो सावधान हो जाएँ । पोंजी स्कीम चलाने वाले (प्रोमोटर) कभी-कभी स्कीम के निवेशकों को और अधिक मुनाफों की पेशकश करते हैं ताकि वे निवेशकों को स्कीम से पैसे निकालने से रोक सकें ।

अरजिस्ट्रीकृत निवेश सलाहकारों के संबंध में सावधानी

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड {विनिधान (निवेश) सलाहकार} विनियम, 2013 के तहत निवेश सलाहकारों को रजिस्ट्रीकरण प्रदान करता है । "निवेश सलाहकार" का अर्थ है - वह व्यक्ति, जो मुनाफे (प्रतिफल) के लिए, ग्राहकों या अन्य व्यक्तियों या व्यक्तियों के समूह को निवेश सलाह देने के कामकाज में लगा हो, और जिसमें वह व्यक्ति सम्मिलित है जो स्वयं को निवेश सलाहकार, चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए, बताता है ।

इस विनियम का उद्देश्य "निवेश सलाह" को विनियमित करना है । निवेश सलाह का अर्थ है - ग्राहक के फायदे के लिए प्रतिभूतियों (सिक्यूरिटीज़) या निवेश उत्पादों (प्रोडक्ट्स) में निवेश करने, उन्हें खरीदने, बेचने या उनमें अन्यथा व्यौहार करने संबंधी सलाह, और निवेश पोर्टफोलियो जिसमें प्रतिभूतियाँ या निवेश उत्पाद शामिल हों, संबंधी सलाह, चाहे लिखित हो, मौखिक हो या संचार के किसी भी अन्य साधन के माध्यम से हो, और जिसमें वित्तीय योजना (फाइनेंशियल प्लानिंग) शामिल होगी : परंतु यह कि ग्राहकों से बिना किसी मुनाफे (प्रतिफल) के, समाचारपत्र, पत्रिकाओं, किसी इलेक्ट्रोनिक या प्रसारण या दूरसंचार माध्यम के जरिये, दी गई निवेश सलाह, जो व्यापक रूप से जनता के लिए उपलब्ध हो, इन विनियमों के प्रयोजन के लिए निवेश सलाह नहीं मानी जाएगी । निवेश सलाहकारों से यह अपेक्षित है कि वे सेबी से रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करें और आचार संहिता का पालन करें ।

सेबी से रजिस्ट्रीकरण प्राप्त किए बिना ही निवेश सलाहकार के रूप में कार्य करना गैर-कानूनी है । सेबी इस तरह की गैर-कानूनी गतिविधि को रोकने के लिए भरसक प्रयास कर रहा है । कुछ बेईमान और समुचित जानकारी न रखने वाली एंटिटियाँ खुद को रजिस्ट्रीकृत नहीं करवातीं और/या, आचार संहिता का पालन नहीं करतीं । निवेश सलाहकारों को सिर्फ सलाह देने का ही कार्य करना चाहिए और नकदी या प्रतिभूतियों के प्रबंधन जैसे कार्यों से दूर ही रहना चाहिए ।

निवेश सलाहकार (आईए) के रूप में कार्य करने वाली रजिस्ट्रीकृत और अरजिस्ट्रीकृत एंटिटियों द्वारा किए जाने वाले कुछ गलत काम (अनाचार), (जो सेबी को सूचित किए गए हैं) इस प्रकार हैं :

  • निवेश सलाहकारों द्वारा ग्राहकों को निश्चित मुनाफों की पेशकश करना ।
  • आकर्षक मुनाफों का झूठा वादे करके ग्राहक से बहुत अधिक फीस वसूलना ।
  • अधिक फीस वसूल करने के लिए ग्राहक के जोखिम प्रोफाइल को ध्यान में न रखते हुए निवेश सलाहकारों द्वारा गलत-विक्रय (मिस-सेलिंग) । नुकसान हो जाने पर ग्राहक की ओर से फीस वापस करने संबंधी शिकायतें प्राप्त होने पर, निवेश सलाहकार द्वारा इस वादे के साथ ग्राहकों को अधिक जोखिम वाले उत्पादों की पेशकश कि वे अपने नुकसान की भरपाई कर पाएँगे ।
  • ग्राहकों की ओर से ट्रेडिंग करना ।
  • ग्राहक की प्रोफाइल के साथ मेल न खाते हुए और ग्राहक की सहमति के बिना ही, ग्राहक को अधिक जोखिम वाले उत्पादों वाली सेवा देना ।
  • निवेश सलाहकार द्वारा खराब सेवा दिए जाने से ग्राहकों को पैसों का नुकसान होना ।
  • धन-वापसी (रिफंड) किए जाने संबंधित मुद्दे ।

निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे जागरूक बनें और बाजार में हो रहे उपरोक्त गलत कामों से अपने आप को बचाकर रखें तथा पूँजी बाजारों में विशेषज्ञता का दावा करने वाली एंटिटियों के साथ लेनदेन करते समय सावधानी बरतें । निवेशक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड {विनिधान (निवेश) सलाहकार} विनियम, 2013 के तहत रजिस्ट्रीकृत एंटिटियों से ही निवेश के संबंध में सलाह लें ।