सेबी के निवेशक संरक्षण उपाय

निवेशक सहायता एवं शिक्षण कार्यालय

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की स्थापना का मुख्य उद्देश्य प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले निवेशकों के हितों का संरक्षण करना है । इसका मुख्य कार्य प्रतिभूति बाजार के विकास का उन्नयन करना और इसका विनियमन करना भी है । निवेशक के लिए निवेश करना तभी सुखद होगा, जब

  • वह यह जानता हो कि निवेश कैसे करना है;
  • उसे बाजार की पूरी जानकारी हो;
  • बाजार सुरक्षित हो और उसमें कोई गलत तत्व न हों; और
  • शिकायतों के मामले में निवारण की व्यवस्था हो । तदनुसार, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड की निवेशक संरक्षण नीति के चार तत्व हैं ।

पहला, शिक्षण और जागरूकता के जरिये निवेशकों में क्षमता निर्माण करना, ताकि निवेशक निवेश के संबंध में सोच-समझकर निर्णय लेने में सक्षम बन सकें । भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि निवेशक निवेश करना सीखे, अर्थात्, वह निवेश से संबंधित अपेक्षित जानकारी प्राप्त करे और उस जानकारी का इस्तेमाल करे, अपने विशिष्ट उद्देश्यों के अनुरूप निवेश के विभिन्न विकल्पों का आकलन करे, किसी विशिष्ट निवेश के संबंध में अपने अधिकारों और बाध्यताओं को समझे, रजिस्ट्रीकृत मध्यवर्तियों (इंटरमीडियरीज़) के माध्यम से लेनदेन करे, आवश्यक एहतियात बरते, किसी शिकायत आदि के मामले में सहायता ले । भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड सीधे भी और निवेशक संघों तथा बाजार सहभागियों के जरिये भी निवेशक शिक्षण और जागरूकता संबंधी कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है, और बाजार सहभागियों को इसी प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए प्रोत्साहित करता रहा है । भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने निवेशकों को शिक्षित करने हेतु एक वेबसाइट बनाया हुआ है, जिस पर अद्यतन तथा विस्तृत जानकारी उपलब्ध है । यह मीडिया के माध्यम से विभिन्न प्रकार की चेतावनियाँ भी जारी करता रहता है । यह टेलीफोन, ई-मेल, पत्रों के जरिये निवेशकों से प्राप्त प्रश्नों का जवाब देता है, और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के कार्यालय में पधारने वाले निवेशकों से मुलाकात करके उनके प्रश्नों का जवाब देता है ।

दूसरा, ऐसी प्रत्येक जानकारी जनता के लिए (पब्लिक डोमेन में) उपलब्ध कराना, जो निवेश के लिए उपयुक्त हो । भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने प्रकटीकरण (डिस्कलोज़र) आधारित विनियामक पद्धति अपनायी है । इस ढाँचे के तहत, निर्गमकर्ता (इश्यूअर्स) और मध्यवर्ती (इंटरमीडियरी) वह जानकारी / वे ब्यौरे प्रकट करते हैं, जो उनसे, उत्पादों (प्रोडक्ट्स) से, बाजार से तथा विनियमों (रेग्यूलेशन्स्) से सुसंगत हो / हों, ताकि निवेशक ऐसे प्रकटीकरणों के आधार पर निवेश के संबंध में सोच-समझकर निर्णय ले सके । भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने विभिन्न प्रकटीकरण (जो आरंभ में तथा सतत् रूप से किये जाते हैं) निर्धारित किये हुए हैं, और यह इन पर नज़र भी रखता है ।

तीसरा,यह सुनिश्चित करना कि बाजार में ऐसी प्रणालियाँ और पद्धतियाँ हों जो लेनदेन को सुरक्षित बनायें । भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने कई कदम उठाये हैं, जैसे स्क्रीन-आधारीय व्यापार प्रणाली, प्रतिभूतियों का गैर-कागज़ीकरण (डीमैटीरिअलाइजेशन), टी+2 आवर्ती निपटान (रोलिंग सेटलमेंट), और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने मध्यवर्तियों (इंटरमीडियरीज़), प्रतिभूतियों के निर्गमन (इश्यू) एवं व्यापार (ट्रेडिंग), कंपनी (कारपोरेट) पुनर्संरचना, आदि को विनियमित करने के लिए विभिन्न विनियम भी बनाये हैं, ताकि प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले निवेशकों के हितों का संरक्षण हो सके । भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यह भी सुनिश्चित करता है कि केवल उपयुक्त तथा उचित व्यक्ति ही बाजार में क्रियाशील रहें, निर्धारित मानदंडों का पालन करने के लिए प्रत्येक सहभागी को प्रोत्साहन मिले, और गलत तत्वों को कठोर दंड मिले ।

चौथा,निवेशक शिकायतों के निवारण को सुगम बनाना । भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड में मध्यवर्तियों और सूचीबद्ध (लिस्टिड) कंपनियों के खिलाफ निवेशकों की शिकायतों के निवारण को सुगम बनाने की एक व्यापक व्यवस्था है । भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड निवेशकों की शिकायतों का निवारण न करने वाली कंपनियों और मध्यवर्तियों के यहाँ अनुस्मारक (रिमाइंडर) भेजकर और उनके साथ बैठकें आयोजित करके अनुवर्ती कार्रवाई भी करता है । जहाँ निवेशक शिकायतों के निवारण की प्रगति संतोषजनक नहीं होती, तो ऐसे में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड कानून के प्रावधानों के अनुसार उपयुक्त प्रवर्तन (इनफोर्समेंट) कार्रवाइयाँ [जिनमें शामिल हैं – न्यायनिर्णयन (एजूडिकेशन) कार्यवाही, अभियोजन कार्यवाहियाँ आरंभ करना, निदेश देना] करता है । भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने निवेशकों के विवादों को सुलझाने के लिए स्टॉक एक्सचेंजों और निक्षेपागारों में व्यापक माध्यस्थम् (आर्बिट्रेशन) व्यवस्था निर्धारित की है । जब कोई दलाल चूककर्ता घोषित हो जाता है, तो ऐसे में निवेशकों को क्षतिपूर्ति करने के लिए स्टॉक एक्सचेंजों में निवेशक संरक्षण निधियाँ मौजूद हैं । निक्षेपागार या निक्षेपागार सहभागी (डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट) की लापरवाही के कारण निवेशकों को हुई हानि की क्षतिपूर्ति निक्षेपागार करता है ।